रावण का किरदार निभाने वाले अरविन्द त्रिवेदी नहीं रहे

Arvind Trivedi ‘Ravan’ Ka Nidhan – हम में से बहुत सरे लोग 90 के दशक में पैदा हुए हैं और यही वो दशक था जिसे सुनहरी समय कहा जाता है क्योंकि इसी समय में  हमें मनोरंजन के वो साधन मिले हैं जिन्हें हम आज भी भुला नहीं पाते| जो लोग इस समय में बड़े हुए हैं वो भला रामायण को कैसे भूल सकते हैं ?

उस समय केवल दूरदर्शन ही टीवी मनोरंजन चैनल हुआ करता था और लोग दूरदर्शन ही देखते थे | 1987 के समय दूरदर्शन पर रामायण सीरियल शुरू हुआ ,रामायण हिन्दू संस्कृति और धर्म का प्रतीक है ,जिसमें भगवान राम द्वारा राक्षस रावण का वध करने की पूरी कथा वर्णित है | 

इसी सीरियल में रावण का किरदार निभाने वाले अदाकार ने अपने रोल को इस तरह से निभाया के वो क्लासिक बन गया , उनके जैसा रावण का किरदार न तो कोई निभा पाता है और न निभा सकेगा | रावण की एक जीती जगती तस्वीर पेश करने वाले अदाकार का नाम है अरविंद त्रिवेदी | आज हम अरविन्द जी के बारे में और विस्तार से जानेंगे |

जन्म और बचपन :

अरविन्द जी का जन्म 8 नवम्बर 1938 में उज्जैन में हुआ , इनके पिता जी एक मिल में साधारण सी नौकरी करते थे  और इनकी माता जी एक गृहणी थी | इनके पिता जी का नाम जेठालाल त्रिवेदी था | भले ही ये मध्यप्रदेश में जन्मे परन्तु ये गुजरात में ही बड़े हुए |  अरविन्द जी ने मुंबई के भवंस कॉलेज से अपनी 12 तक की शिक्षा पूरी की | अरविन्द जी राम भक्त थे , और इनके बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी एक एक्टर थे , जो गुजरती फिल्मों के जाने माने चेहरे थे |  अरविन्द जी हमेशा रामलीला देखने जाते थे और रामलीला में ही इन्होंने रावण का रोल करना शुरू किया |

लोग इनके किरदार को बहुत पसंद करते थे जिससे इनका खूब नाम हो गया था |

करियर :

अरविन्द जी को एक एक्टर ही  बनना था , इन्होंने बहुत मेहनत के साथ छोटे छोटे किरदारों को निभाया और उनकी मेहनत रंग लायी और उन्हें एक गुजराती फिल्म में काम करने का मौका मिला |  इन्होंने 1971 में हिंदी फिल्म पराया धन से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की | अपने पुरे करियर में इन्होंने लगभग 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और बहुत सारे टीवी सीरियल्स में भी काम किया परन्तु इनका सबसे ज्यादा चर्चित काम रामानंद सागर की बनाई रामायण में किया गया रावण का किरदार था |

रामायण के इलावा उन्होंने विक्रम बेताल , जंगल में  मंगल , आज की ताज़ा खबर , पराया धन , देश रे जोया दादा प्रदेश जोया और ढोली जैसी फिल्मों और सिरिअल्स में काम किया और हर बार अपने काम की छाप छोड़ी है |

रामायण खत्म होने के बस इनको बहुत साडी फिल्मों और सेरिअल्स से काम के लिए ऑफर आने शुरू हुए और वो सभी ऑफर खलनायकों के किरदार के लिए ही आते थे , परन्तु अरविन्द जी ने रामायण के बाद कुछ खास काम नहीं किया और 1991 में उन्होंने अभिनय छोड़ कर राजनीती को चुन लिया और वो भारतीय जनता पार्टी से संसद भी रहे |

किस्सा रावण बनने का :

1985 – 86 में अरविन्द जी को पता चला के रामानंद  जी रामायण बना रहे हैं , वो तुरंत रामानंद जी के पास पहुंचे और उनसे रामायण में काम करने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की , रामानंद जी ने अरविन्द जी से पूछा  के आप कोनसा किरदार निभाना चाहते हैं तो अरविन्द जी ने बोलै के उन्हें केवट का किरदार चाहिए , केवट ने ही भगवान राम को नदी पर करवाई थी और उनक पैर छुए थे, और अरविन्द जी थे भी राम भक्त , तो उन्होंने ये किरदार चुना , रामानंद जी ने अरविन्द जी को अगले दिन आने के लिए कहा , जब अरविन्द जी अगले दिन पहुंचे तो देखा के 300 से भी ज्यादा लोग रावण के किरदार के लिए ऑडिशन देने आये हैं , पर रामानन्द जी को रावण के किरदार के लिए कोई अभिनेता नहीं मिल रहा था , अरविन्द जी एक तरफ बैठे थे , रामानंद जी ने अरविन्द जी को स्क्रिप्ट दी और कहा के इसके अनुसार चल कर दिखाओ ,  अभी अरविन्द जी कुछ कदम ही चले होंगे के रामानंद जी ने उनको केवट की जगह रावण के किरदार के लिए चुना और हम सब जानते हैं के ये किरदार उनके द्वारा निभाया सबसे अहम किरदार था , और उन्होंने रावण के किरदार को इतनी खूबसूरती से निभाया के वो जीवंत हो गया | 

उनके द्वारा निभाया रावण का किरदार आज भी एक मिसाल बना हुआ है , अरविंद जी को लोग उनके नाम से नहीं बल्कि लंकापति कह कर बुलाने लग गए थे और उनके बच्चों को रावण के बच्चे कह कर बुलाते थे |  ऐसा भी कहा जाता है के अरविंद जी शूटिंग के समय उपवास रखते थे , क्योंकि वो राम भक्त थे ,और  रावण के किरदार में वो भगवान राम को उल्टा सीधा बोलते थे जिसके  लिए वो व्रत रखते थे , शूटिंग से पहले वो भगवान राम और शिव की पूजा करते थे | 

अन्य जानकारी :

अरविन्द जी को गुजरात सर्कार द्वारा 7 बार बेस्ट एक्टर के पुरुस्कार से नवाज़ा गया | अरविन्द जी ने लगभग 300 से ज्यादा फिल्मों और सिरिअल्स में काम किया और वो 2002 में भारतीय सेंसर बोर्ड के मेंबर  भी रहे |

अरविन्द जी ने अपने जीवन में बहुत सारी कठिनाइयों को  झेला | 1966 में उनकी शादी नलिनी जी के साथ हुई और इनकी 3 बेटियां हुई | अरविन्द जी ने रावण के किरदार को ऐसे निभाया के आज भी लोग उन्हें देखना पसंद करते हैं | किसी ने भी असलियत में रावण को नहीं देखा पर जब दर्शकों ने अरविन्द जी को देखा तो सबके मन में रावण की एक रूपरेखा बन गयी | इसके बाद भी टीवी पर बहुत बार रामायण नए नए तरीकों से प्रसारित हुआ पर कोई भी रावण इतना ज्यादा पसंद नहीं किया गया |

अरविन्द जी की मृत्यु इसी 5 अक्टूबर को मुंबई में हुई| 

बेशक अरविन्द जी आज हमारे बीच नहीं है पर उनके द्वारा निभाया किरदार सदा हमारे बीच रहेगा| 

Rahul Sharma

हमारा नाम है राहुल,अपने सुना ही होगा। रहने वाले हैं पटियाला के। नाजायज़ व्हट्सऐप्प शेयर करने की उम्र में, कलम और कीबोर्ड से खेल रहे हैं। लिखने पर सरकार कोई टैक्स नहीं लगाती है, शौक़ सिर्फ़ कलाकारी का रहा है, जिसे हम समय-समय पर व्यंग्य, आर्टिकल, बायोग्राफीज़ इत्यादि के ज़रिए पूरा कर लेते हैं | हमारी प्रेरणा आरक्षित नहीं है। कोई भी सजीव निर्जीव हमें प्रेरित कर सकती है। जीवन में यही सुख है के दिमाग काबू में है और साँसे चल रही है, बाकी आज कल का ज़माना तो पता ही है |

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