अंटार्कटिक महाद्वीप के बारे में रोमांचक जानकारी

बर्फ की चददर से ढका हुआ, बड़े बड़े ग्लेशियर से बना हुआ, जमी हुई झीलों और हाड मास को जमा देने वाली ठंड देने वाला दुनिया का सबसे ठंडा स्थान है अंटार्कटिक महाद्वीप |

ये जगह दुनिया की एक ऐसी जगह है जहाँ अभी किसी देश की सरकार नही है | ये वो जगह है जहाँ कि सुरक्षा के लिए सैनिकों को अपनी जान की कुर्बानी नहीं देनी पड़ती |

हालाँकि बहुत से बड़े बड़े देश इस जगह पर भी अपना दावा करते रहे हैं लेकिन अंटार्कटिक ट्रीटी ऑफ 1959 के अनुसार इस समझौते को मानने वाले देश इस महाद्वीप पर कोई भी मिलिट्री एक्टिविटी, मिनरल माइनिंग या वेस्ट पदार्थों को नहीं फैंकेंगे |

इस समझौते को अब तक 53 देश साइन कर चुकें हैं जिसमे भारत भी शामिल है |

ये वो जगह है जहाँ इंसानो की बस्तियाँ कम हैं, लेकिन जमा देने वाली ठंड के बावजूद कुछ जानवर यहाँ देखे जा सकते हैं |

अंटार्कटिक महाद्वीप के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे ही कुछ और इंटरेस्टिंग फैक्ट्स |

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आइए जानते हैं

अंटार्कटिक महाद्वीप के बारे में रोमांचक जानकारी – Information about Antarctica in Hindi

दुनिया का सबसे ठंडा स्थान

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अंटार्कटिक दुनिया का सबसे ठंडा स्थान है जहाँ पर साल का औसतन तापमान -58 डिग्री फेरन्हाइट रहता है और जहाँ पर 1983 में सबसे कम तापमान -128 डिग्रीस फेरन्हाइट रिकॉर्ड किया गया जो की सबसे कम तापमान था |

अंटार्कटिक में सबसे अधिक तापमान 58.2 डिग्री फेरन्हाइट यानी 14.5 डिग्री सेल्सिस रिकॉर्ड किया गया | इस जगह पर इतनी बर्फ है कि ये स्थान दुनिया का इकलौता सबसे बड़ा बर्फ़ीली ज़मीन का स्थान है |

पूरी दुनिया की 90% ताजे पानी की बर्फ इस महाद्वीप पर है इसके साथ ही पूरी दुनिया का 70% ताज़ा पानी भी इसी जगह पर सिमटा हुआ है |

फिर भी इस महाद्वीप पर कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहाँ पिछले 20 लाख सालों से ना तो बारिश हुई है ना ही बर्फ गिरी है |

अंटार्टिक महाद्वीप पर बर्फ की परत की औसतन मोटाई 1.6 किलोमीटर है |

उल्कापिंड यहाँ देखे जा सकते हैं

अगर आपको अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों में रूचि है तो आपको अंटार्कटिक की यात्रा ज़रूर करनी चाहिए क्यूंकि यहाँ पर आपको दुनिया के सबसे ज़्यादा उल्कापिंड देखने को मिल सकते हैं |

यहाँ का कम तापमान और बर्फ इन उल्कापिंडों को संरक्षित रखने का काम करती है | एक अनुमान के अनुसार 1970 से अब तक यहाँ 10000 से भी ज़्यादा उल्कापिंड मिल चुकें हैं जिनमें से कुछ तो लाखों साल पुराने हैं | पूरी दुनिया से मिले 90% उल्कापिंड अंटार्कटिक महाद्वीप से ही मिले हैं |

अंटार्कटिक में डॉयनासोर की दो नयी प्रजातियां भी मिल चुकी हैं |

नो टाइम ज़ोन

क्योंकि साउथ पोल अंटार्कटिक महाद्वीप के मध्य में है इसलिए इस महाद्वीप का कोई भी टाइम ज़ोन नहीं है | इस के बारे में ऐसा भी कहा जा सकता है ये महाद्वीप सभी टाइम ज़ोन्स में है |

यहाँ पर जाने वाले टूरिस्ट और वैज्ञानिक अपने अपने देश के टाइम ज़ोन के हिसाब से यहाँ आते हैं |

नो रेपटाइल्स

पूरी दुनिया में अंटार्कटिक ही एक ऐसा महाद्वीप है जहाँ पर आपको कोई भी रेंगने वाला जानवर नही मिलेगा | इसी तरह से चींटियां इस दुनिया में लगभग हर जगह मिल जाएँगी लेकिन अंटार्कटिक महाद्वीप पर आपको चींटियां भी नहीं मिलेंगी |

अंटार्कटिक महाद्वीप के आस पास के समुंदर में बहुत सी वेल्स रहती हैं | ये महाद्वीप पेंग्विन्स और सील्ज़ का घर भी है | इस महाद्वीप पर एक ही इंसानी बस्ती है चिली जहाँ पर एक स्कूल, हॉस्पिटल, पोस्ट ऑफिस आदि है |

लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इस महाद्वीप पर बहुत से जंगल थे |

ब्लड-रेड वॉटरफॉल

इतनी ठंडी और खूबसूरत जगह पर एक लाल रंग का पानी का झरना भी बहता है जिसे ब्लड रेड वॉटरफॉल के नाम से भी जाना जाता है | 911 में जब इस जगह की खोज हुई तो लोगो को समझ में नही आया कि इसके पानी का रंग लाल क्यूँ है |

इसीलिए इस जगह को ब्लड फॉल्स के नाम से जाना जाने लगा |

शुरू में वैज्ञानिको को लगा कि ये लाल रंग लाल शैवालों की वजह से है लेकिन बाद में अध्ययन से पता चला कि ये लाल रंग आइरन से भरे साल्टवाटर के हवा के सम्पर्क में आने से जंग लगने की वजह से हुआ है |

टेलर ग्लेशियर के उत्तर में फैला ये ब्लड फॉल 100 किलोमीटर में फैला है |

Mohan

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