मधुमक्खियों के बारे में रोमांचक तथ्य

शहद हमारे शरीर और त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है लेकिन क्या आप शहद को तैयार करने वाली मक्खियों यानी मधुमक्खियों के बारे में ऐसे फैक्ट्स जानते हैं जो आपको हैरान कर सकते हैं |

शहद हमारे स्वास्थ्य और त्वचा दोनों के लिए फायदेमंद होता है | आइए बड़ी मेहनत से इस शहद को तैयार करने वाली मधुमक्खियों के बारे में कुछ रोमांचक तथ्य जानते हैं |

जैसे कि एक मधुमक्खी के शरीर पर 30 लाख से ज़्यादा बाल होते हैं | जी हाँ, 30 लाख बाल जितने बाल एक गिलहरी के शरीर पर भी होते हैं | लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक आदमी के सिर पर बालों की संख्या सिर्फ़ 10 लाख होती है |

इसी तरह के रोमांचक तथ्य जानते हैं हनी बी के बारे में |

interesting facts about honey bee in hindi
Interesting Facts About Honey Bee in Hindi

मधुमक्खियों के बारे में रोमांचक तथ्य – Interesting Facts About Honey Bee in Hindi

हॉरनेट को जिंदा पका देती है मधुमक्खियां

आप जानते हैं मधुमक्खियां पीले रंग के भिंड जिसे हॉरनेट कहते हैं उसे कैसे अपना शिकार बनती हैं | जब कोई भिंड मधुमक्खियों के छत्ते में घुस जाता है तो सभी मधुमक्खियां एक दूसरे को सिगनल भेजती हैं और सभी मक्खियां कांपना करना शुरू कर देती हैं |

जिससे छत्ते का तापमान बढ़ने लगता है जो कि 47 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है जिसे मधु मखियाँ तो सहन कर लेती हैं लेती भिंड उसमे पक जाती है |

मधुमक्खियां इंसानो से ज़्यादा मेहनती होती हैं

मधुमक्खियां में रानी मक्खी, ड्रोन बीस और वर्कर बीस होती हैं | वर्कर बीस गर्मियों में सिर्फ़ 6 हफ़्तो तक जिंदा रह पाती हैं और तब तक काम करती हैं जब तक मर नही जाती |

मधुमक्खी का डंक भी है फयदेमंद

मधुमक्खी का डंक पीड़ादायक होता है लेकिन इसके डंक का जहर हूमें बहुत से बीमारियों से भी बचा सकता है | यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पाउलो में हुई एक रिसर्च के अनुसार मधु मखी का डंक रूमटॉइड आर्थराइटिस (rheumatoid arthritis) से होने वाले दर्द से आराम दिलाता है |

इस रिसर्च में पाया गया कि मधु मक्खी (honey bee) के जहर से हमारे शरीर में एंटी इंफ्लेमेटरी हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है जिससे आर्थराइटिस के दर्द में राहत मिलती है |

प्राचीन मिस्रवासी मम्मी पर डालते थे शहद

प्राचीन ईजिप्टवासी शहद का इस्तेमाल भोजन और दवाओं में किया करते थे | इसके साथ ही मम्मी पर शहद का लेप भी लगाया जाता था | मधुमक्खियों के द्वारा बनाए गये मोम को काले जादू और चीज़ों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था |

मधुमक्खियां लाल रंग नही देख सकती

दूसरी मक्खियों की ही तरह से मधुमखियाँ भी लाल रंग को नही देख सकती | लेकिन फिर भी वो लाल रंग के फूलों का रस चूस पाती है क्यूंकी वो फूलों के यू वी पैटर्न को देख पाती हैं |

पूरी जिंदगी में बनाती हैं एक चम्मच का 1/12 शहद

क्या आप जानते हैं मक्खियों की प्रजातियों में केवल मधुमक्खियां ही हैं जो इंसानो के लिए खाने का कुछ बनाती हैं | एक मधुमक्खी अपनी पूरी जिंदगी में एक चाय के चम्मच का 1/12 हिस्सा ही शहद बनाती है |

मधुमक्खियां रानी मक्खी को मार भी सकती हैं

जब एक राजा अपनी प्रजा के लिए संसाधन जुटाने में असमर्थ रहता है तो प्रजा विद्रोह कर सकती है वैसे ही जब मधुमक्खियों के झुंड में रानी मक्खी बूढ़ी होने लगती है और पर्याप्त मात्रा में अंडे नही दे पाती तो दूसरी मधुमक्खियां रानी मक्खी को मौत के आलिंगन से मार डालती हैं |

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इंसानो का चेहरा पहचानती हैं मधुमक्खियां

मधुमक्खियां इंसानो का चेहरा वैसे ही बनाती हैं जैसे इंसान बनाते हैं वो अलग अलग बॉडी पार्ट्स जैसे आइब्रो, लिप्स और कानों को इक्कठा करके चेहरे की संरचना का निर्माण कर लेती हैं |

इस तकनीक को कॉंफ़ीगुलर प्रोसेसिंग (configular processing) कहा जाता है इससे फेस रिकग्निशन (face recognition) की तकनीक को ओर बेहतर किया जा सकता है |

बड़ी मैथमेटिकल प्रॉब्लम्स को आसानी से सुलझा सकती हैं

अगर आपको एक ही दिन 6 दोस्तों के घर जाना है और आप चाहते हैं की आप एक ऐसा रास्ता चुनें जिसमे आप सभी दोस्तों के घर भी जा पाएँ और ये सबसे छोटा रास्ता भी हो |

ऐसी मैथ प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए इंसान को कंप्यूटर तक की ज़रूरत पड़ती है लेकिन मधुमखियों के लिए ये बहुत ही आसान काम है |

लंदन की रॉयल हॉलोवे यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च के अनुसार मखियाँ फूलों के बीच में सबसे छोटे रास्ते को आसानी से पहचान सकते हैं | वास्तव में सिर्फ़ वो ही एक ऐसी जानवरों की प्रजाति है जो इस तरह की प्राब्लम को सॉल्व कर सकती है |

सबसे किफायती निर्माणकर्ता होती हैं

36 बीसी में मार्कस तेरेंटीउस वारो ने कहा था की मधु मखियों के द्वारा बनाए गये छत्ते दुनिया के सबसे अद्भुत और सस्ते निर्माण हैं |

इसके सैंकड़ों सालो बाद ग्रीक मेथेमैटिशन पप्पुस ने भी यही कहा और इसके 2000 साल बाद थॉमस हेल्स ने अपनी 19 पेज के मैथमेटिकल प्रूफ में दिखाया कि कैसे मधु मखियों के छत्ते में किसी भी इंसानी तरीके से बनाए निर्माण के मुक़ाबले सबसे कम मोम का इस्तेमाल हुआ |

Mohan

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