5 Mahasagar Ke Naam (Ocean Names in Hindi)

हमारी धरती इतनी विशाल है के इसके हर एक कोने के बारे में ज्ञान हासिल करना न मुमकिन है। आप चाह कर भी सभी इलाकों के बारे में जानकारी हासिल नहीं कर सकते। 

हमारी पूरी पृथ्वी पर 7 अरब से भी ज्यादा लोग रहते हैं और इतने लोग पृथ्वी के केवल 30 प्रतिशत जितने इलाके में रहते हैं | क्योंकि धरती का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है यानी के धरती के इतने बड़े हिस्से पर पानी का कब्ज़ा है। 

हमारी पृथ्वी जिस आकाश गंगा में है उसमे अरबों ग्रह हैं और हमारे वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे है के इतने ग्रहों में से केवल हमारे ग्रह पृथ्वी पर ही पानी मौजूद है। 

ऐसा कहा जाता है के अब तक जब विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है तो भी धरती पर मौजूद समुद्र में से 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अभी तक खोजा ही नहीं गया है। 

हो सकता है जो समुद्री इलाका हमारी पहुंच से बाहर है उसमे धरती के विकास और मानव जाति से संबंधित कितने ही जरूरी सबूत मौजूद हों। 

महासागर हमेशा से ही हम इंसानों के लिए दिलचस्पी का केंद्र बना रहा है और हमेशा से ही मानव सागरों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करना चाहता है।

आज विज्ञानं की तरक्की के साथ हमने सागरों में इंटरनेट ट्रेन बिछा दी, सागरों को हम यातायात के साधन के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं, सागरों से पेट्रोल के साथ साथ और भी बहुमूल्य खनिजों को ढूंढने लगे हैं, यानि सागर हर एक तरह से हमारे लिए फायदेमंद है और हम किसी न किसी तरह से इनसे जुड़े हुए हैं। 

क्या आपको धरती पर मौजूद सागरों के नाम पता है ? अगर नहीं तो घबराइए मत, आज हम आपको इन महासागरों से जुड़ी हर जानकारी देंगे। 

क्या सागर और महासागर एक हैं? Difference Between Sea and Ocean in Hindi

अक्सर जब भी सागर (Sea) या महासागर(Ocean) की बात होती है तो बहुत सारे लोग इनको एक ही मानते हैं पर ऐसा नहीं है। सागर और महा सागर में बहुत फर्क होता है। सागर एक से दूसरे देश तक फैले हो सकते हैं पर महासागर महाद्वीपों पर अपना कब्ज़ा किये हुए हैं। 

सबसे पहला अंतर तो यही है के महासागर, किसी भी सागर से आकर में बहुत बड़े होते है। प्रशांत और अटलांटिक महासागर ही पूरी पृथ्वी के 40 प्रतिशत से भी ज्यादा इलाके में फैले हुए हैं।

महासागर कई सागरों का मेल हो सकता है। 

सागर कहीं न कहीं जमीन तौर पर जुड़े होते हैं पर महासागरों के साथ ऐसा नहीं होता। महासागरों के आसपास कोई जमीनी इलाका नहीं होता और न ही आस पास किसी तरह का इंसानी जीवन हो सकता है।

और सबसे ज्यादा अंतर दोनों की गहराई में होता है। वैज्ञानिक एक सागर की गहराई को माप सकते हैं पर महासागर की गहराई को मापना नामुमकिन है। 

ये कुछ खास फर्क होते हैं एक सागर और महासागर में। नदियां मिल कर सागर बनती है और सागर मिलकर महासागर। 

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कौन कौन से हैं महासागर ? Mahasagar ke Naam (Ocean Names)

Mahasagar Ke Naam

हमारी धरती पर बहुत सारे सागर हैं पर हमारी धरती पर महासागरों की संख्या केवल 5 है। उनके नाम 

  • प्रशांत महासागर (Pacific Ocean)
  • अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean)
  • हिन्द महासागर (Indian Ocean)
  • दक्षिणी ध्रुव महासागर (Southern Ocean)
  • आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean)

हैं। आज हम आपको इन सभी महासागरों के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean)

वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गयी सबसे गहरी समुंद्री खाड़ी मरियाना ट्रेंच है जिसकी गहराई लगभग 10 हज़ार मीटर से भी ज्यादा है और ये खाड़ी इसी महासागर में मौजूद है। 

प्रशांत महासागर 6 लाख 36 वर्ग मील जितने इलाके में फैला हुआ है जिसके आकार के बारे में कल्पना करना हमारे बस से बाहर है। 

प्रशांत महासागर में छोटे बड़े मिला कर कुल 20 हज़ार से ज्यादा महाद्वीप हैं जिनमे से अधिकतम महाद्वीपों पर इंसानों ने डेरा डाला हुआ है। 

पृथ्वी पर मौजूद यह महासागर त्रिभुज आकर में हैं जो इसे धरती का सबसे बड़ा और गहरा महासागर बनती है। 

प्रशांत महासागर को अंग्रेजी में Pacific Ocean कहा जाता है जिसका अर्थ होता है शांत समुन्द्र। इसे यह नाम एक दार्शनिक Ferdinand Magellan ने दिया था। 

हम आपको बता दें के आज पूरी दुनिया पानी के प्रदूषण से जूझ रही है जिससे इंसानों के साथ साथ समुंन्दर में रहने वाले जीवन पर भी असर पड़ रहा है और प्रशांत महासागर में सबसे ज्यादा प्रदूषण पाया जाता है। 

अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean)

अटलांटिक को अंधमहासागर भी कहा जाता है। कुछ लोग मानते हैं के अटलांटिक नाम पौराणिक यूनानी देवता एटलस के नाम पर रखा गया है। 

ये महासागर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और गहरा महासागर है जिसका क्षेत्रफल लगभग 4 करोड़ लाख वर्ग मील जितना विशाल है। दुनिया की सबसे खतरनाक जगह मानी जाने वाला बरमूडा ट्रायंगल इसी महासागर का हिस्सा है। 

ये महासागर आधुनिक अफ्रीका और यूरोप जैसे महाद्वीपों को एक दूसरे और पूरी दुनिया से अलग करता है। 

अंधमहासागर का खोजा गया सबसे गहरा हिस्सा पुरतो रीको ट्रेंच है जिसकी गहराई 24 हज़ार फ़ीट जितनी गहरी अनुमानित है। 

हम आपको बता दें के अकेला अंध महासागर पूरी धरती के 21 प्रतिशत जितने इलाके पर फैला हुआ है और लगभग पूरी पृथ्वी पर उपस्थित पानी का 23 प्रतिशत केवल इसी महासागर में है। 

हिन्द महासागर (Indian Ocean)

इसका नाम हमारे देश के नाम पर पड़ा है।  ये पूरी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और गहरा महासागर है जो लगभग 3 करोग वर्ग मील जितने इलाको को घेरे हुए है। 

हिन्द महासागर का ज़िक्र हमारे पुराणों में भी हुआ है वहां इसे रत्नाकर नाम दिया गया है जसका अर्थ होता है रत्न पैदा या देने वाला।

ये महासागर अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप तक फैला हुआ है। हिन्द महासागर का सबसे गहरा इलाका जहाँ तक वैज्ञानिक पहुंच पाए हैं वो है सुंडा ट्रेंच जिसे पहले जावा ट्रेंच भी कहा जाता था।

इस महासागर का तापमान बाकि महासागरों से ज्यादा है जिसकी वजह से इसमें समुंद्री जीवन बहुत कम होता है। इस महासागर की सबसे खास बात यह है के हमारे देश की पवित्र नदी गंगा लगभग 6000 किलोमीटर का सफर पूरा करके इस महासागर में आकर मिल जाती है। 

बंगाल की खाड़ी भी इसी महासागर में मिलती है। दुनिया में तेल की कमी को पूरा करने का काम भी हिन्द महासागर करता है।  एक अनुमान के मुताबिक कुल दुनिया का 40 प्रतिशत जितना तेल उत्पादन हिन्द महासागर से होता है। 

दक्षिणी ध्रुव महासागर (Southern Ocean)

ये महासागर दुनिया का चौथा बड़ा महासागर है जिसका कुल क्षेत्रफल डेढ़ करोड़ लाख वर्ग मील के बराबर है। इस महासागर का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी बर्फ से ढका हुआ है या बर्फ बना हुआ है। पूरी दुनिया में मौजूद कुल ताज़े पानी का लगभग 70 प्रतिशत इस महासागर की बर्फ के रूप में मौजूद है और केवल इस महासागर की बर्फ पूरी दुनिया की 90 प्रतिशत बर्फ है। 

ये धरती के बिलकुल दक्षिण में स्थित है और ये अंटार्टिक महाद्वीप को बाकि दुनिया से अलग करता है। अंटार्टिक महाद्वीप पूरी दुनिया के एक ऐसा इलाका है जहाँ आज भी केवल कुछ हज़ार लोग ही बस्ते हैं और वैज्ञानिक आज भी इस महाद्वीप  और महासागर के ऊपर रिसर्च कर रहे हैं। 

इस महासागर का तापमान पूरी दुनिया के मुकाबले बहुत कम रहता है इस लिए यहाँ पर समुंद्री जीवन बहुत सीमित मात्रा में मिलता है। इस महासागर में पेंगुइन, नीली व्हेल, फर वाली सील,काफी मात्रा में मिलती है। 

आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean)

जैसे अटलांटिक महासागर पृथ्वी के दक्षिण में स्थित है ऐसे ही ये महासागर पृथ्वी के उत्तरी छोर पर स्थित है। ये दुनिया का सबसे छोटा महासागर है जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 55 लाख वर्ग मील जितना है जिसकी वजह से कुछ वैज्ञानिक इसे महासागर भी नहीं मानते बल्कि इसे अंध महासागर के भूमध्य सागरों का एक हिस्सा मानते हैं। 

ये महासागर साल के ज्यादातर समय में बर्फ से ढका रहता है और जब तेज़ गर्मी पड़ती है तो इसकी बर्फ पिघल जाती है जिससे ये महासागर और विशाल लगता है।  इस वजह से कुछ लोग इसे छुपा हुआ महासागर भी कहते हैं। 

आर्कटिक महासागर का नाम ग्रीक भाषा के शब्द अर्कटोस से पड़ा है जिसका मतलब भालू होता है। ये महासागर इतना छोटा है के ये धरती के केवल 3 प्रतिशत हिस्से पर फैला हुआ है। यहां पर भी ठंड बहुत ज्यादा होती है जिसकी वजह से केवल गिनती के लोग ही यहां रहते है। 

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महासागर में प्रदूषण का खतरा Pollution in Oceans

हमने ऊपर आपको धरती पर मौजूद सभी महासागरों के बारे में जानकारी दी और विस्तार से बताया। अटलांटिक और आर्कटिक महासागर उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर होने की वजह से वह तापमान बाकि दुनिया से बहुत अलग रहता है। ज्यादातर समय वहां बर्फ जमी रहती है। 

इनके अंदर जमी हुई बर्फ पूरी पृथ्वी के वातावरण को संतुलित रखने के लिए बहुत जरूरी है। पर आज के समय पूरी दुनिया में प्रदूषण इतनी ज्यादा मात्रा में फेल रहा है के इन बड़े बड़े विशाल महासागरों की बर्फ लगातार पिघल रही है। 

हमारे महासागरों में प्रदूषण बहुत ज्यादा हो गया है। हर साल करोड़ों टन प्लास्टिक कूड़ा हमारे सागरों से निकला जाता है जो समुंद्री जीवन के साथ साथ हमारे लिए भी बहुत बड़ा खतरा है। 

धरती पर लगातार होते विकास की वजह से लगातार निर्मित होती फैक्टरी और उनसे निलकते खतरनाक धुएं की वजह से हमारे वातावरण की गर्मी बढ़ती जा रही है जिससे दोनों बर्फीले महासागर लगातार पिघलते जा रहे हैं। 

साफ़ पानी की कमी होती जा रही है और महासागरों में गंदे पानी की भरमार हो रही है। कुछ ही दशकों में जलीय जीवन की कितनी ही प्रजातियां या तो लुप्त हो चुकी हैं या लुप्त होने की कगार पर हैं। 

हमारे महासागरों के बारे में पूर्ण जानकारी केवल उनके नाम जानने से नहीं होगी, हमें ये भी जानना होगा के हमने आज इन महासागरों का क्या हाल कर दिया है। 

महासागर में छुपे हैं बहुत से राज

पृथ्वी पर जितने महासागर मौजूद हैं उनका केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही अभी देखा गया है। ये महासागर अपने अंदर कितने रहस्य छुपाए बैठे हैं ये किसी को भी नहीं पता। इतिहासकारों के अनुसार दुनिया में आयी बड़ी से बड़ी सभ्यताएं जो मिट गयी है संभावित तौर पर उनके निशान आज भी किसी न किसी महासागर में मिल सकते हैं। 

इन महासागरों की गहराई को मापना इंसानों की बस की बात नहीं, हाँ आने वाले भविष्य में इंसान ऐसी कोई तकनीक बना पाएं वो अलग बात है पर फ़िलहाल के समय इंसान किसी भी महासागर की गहराई को सटीक रूप से माप नहीं सकते। 

वैज्ञानिकों के अनुसार इन महासागरों की गहराईओं में आज भी हमें ऐसा समुद्री जीवन देखने को मिल सकता है जिसकी हम केवल कल्पना कर सकते है। 

आज ये महासागर पूरी दुनिया में यातायात और व्यापर का एक अच्छा साधन बने हैं। हर रोज अरबों रुपए का सामान इस देश से उस देश इन महासागरों के जरिये ही भेजा जाता है। हज़ारों सालों से, जब हवाई जहाज़ के बारे में किसी सोचा भी नहीं था उस समय से महासागर आम जनता और व्यापारिओं के लिए बहुत मददगार साबित हुए। आज ही लोग जितना हवाई सफर को पसंद करते हैं उससे ज्यादा महासागरों को पार करना पसंद करते हैं। 

हमने आपको हमारी धरती पर मौजूद सभी Mahasagar Ke Naam और महासागरों के बारे में पूरी जानकारी दी है। क्या आपको इससे पहले इन महासागरों के बारे में इतनी जानकारी थी ? अगर आपके पास भी इन महासागरों के बारे में कोई जानकारी है जो आप साझा करना चाहते है तो कमेंट करके जरूर बताएं। इसी तरह की और रोमांचक जानकारियां हासिल करने के लिए पढ़ते रहिये।

Rahul Sharma

हमारा नाम है राहुल,अपने सुना ही होगा। रहने वाले हैं पटियाला के। नाजायज़ व्हट्सऐप्प शेयर करने की उम्र में, कलम और कीबोर्ड से खेल रहे हैं। लिखने पर सरकार कोई टैक्स नहीं लगाती है, शौक़ सिर्फ़ कलाकारी का रहा है, जिसे हम समय-समय पर व्यंग्य, आर्टिकल, बायोग्राफीज़ इत्यादि के ज़रिए पूरा कर लेते हैं | हमारी प्रेरणा आरक्षित नहीं है। कोई भी सजीव निर्जीव हमें प्रेरित कर सकती है। जीवन में यही सुख है के दिमाग काबू में है और साँसे चल रही है, बाकी आज कल का ज़माना तो पता ही है |

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