मोहनदास से महात्मा तक का सफर

Mahatma Gandhi Biography in Hindi – मोहनदास करमचंद गाँधी यानि के महात्मा गाँधी, एक ऐसे महान पुरुष हैं जिन्हे किसी परिचय की जरूरत नहीं है | आज महात्मा गाँधी जी को भारत का हर बच्चा, बजुर्ग यानि हरेक व्यक्ति जानता है | महात्मा गाँधी जी अहिंसा के भक्त थे और देश की आज़ादी की लड़ाई में जैसे उन्होंने शांति पूर्वक लड़ाई लड़ी है, उससे हर कोई वाकिफ है |

तभी तो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में महात्मा गाँधी जी को इतना सत्कार और सम्मान दिया जाता है | 

भारत ने अंग्रेज़ों से स्वतन्त्रता हासिल करने के लिए बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी | भारत लगभग 300 साल तक अंग्रेज़ों का  गुलाम रहा | बहुत सारे शूरवीरों ने भारत की इस स्वतन्त्रता की लड़ाई में हिस्सेदारी दी, बहुत सारे स्वतन्त्रता सैनानियों ने गोला बारूद से अंग्रेज़ों का सामना किया और अंग्रेज़ों द्वारा किये जा रहे अत्याचारों का मुँह तोड़ जवाब दिया |

mahatma gandhi biography in hindi
Mahatma Gandhi Biography in Hindi

स्वतन्त्रता की इस लड़ाई में न जाने कितने ही शूरवीरों ने अपनी जान देश पर कुर्बान कर दी और देश को आज़ादी दिलाने में योगदान दिया | 

परन्तु महात्मा गाँधी जी इन सबसे अलग थे, वो भारत की आज़ादी की लड़ाई में सबसे आगे थे पर वो बिना गोला बारुद के, बिना हिंसा किये शांति पूर्वक आज़ादी चाहते थे | और उन्होंने ऐसा किया भी, अंग्रेज़ों के अत्याचारों का मुकाबला शांति से किया, क्योंकि वो मानते थे के अहिंसा सबसे बड़ा हथ्यार है | और उनकी अहिंसावादी सोच और स्वाभाव के आगे अँगरेज़ भी टिक न पाए और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को भारत को आज़ादी दे दी और हमारा देश छोड़ कर हमेशा के लिए चले गए | 

2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में गाँधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, इस दिन महात्मा गांधी जी का जन्मदिन होता है | इस दिन को पूरा विश्व International Day of Non-Violence के रूप में भी मनाता है | तो आज हम और आप मिल कर महात्मा गांधी जी के जीवन को विस्तार से जानेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि भेंट करेंगे |

महात्मा गाँधी की जीवनी (जन्म और बचपन) Mahatma Gandhi Biography in Hindi

मोहन दास से महात्मा बनने का सफर आसान नहीं रहा | ये सफर बहुत  लम्बा और कठिनाइयों भरा था | मोहन दास का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 में करमचंद गांधी जी के घर हुआ | उनकी माता जी का नाम पुतलीबाई था |

करमचंद गांधी जी उस समय के दीवान थे और माता जी बेहद धार्मिक प्रवृत्ति वाली महिला थी जिसका ज्यादातर समय मंदिर और भगवान की सेवा में ही जाता था | मोहनदास जी या महात्मा गांधी जी के जीवन पर उनकी माता जी का प्रभाव सबसे ज्यादा था | अहिंसा की शिक्षा उन्हें अपनी माता जी से मिली थी | 

उस समय बल विवाह का चलन था और इसी चलन के चलते गाँधी जी का विवाह 13 साल की आयु में कस्तूरबाई माखंजी कपाड़िया से हो गया था | कस्तूरबा इनसे उम्र में बड़ी थी | एक विद्यार्थी के रूप में गाँधी जी कोई विशेष नहीं थे |

वो एक सामान्य विद्यार्थी थे पर वो पढ़ाई और खेल कूद में तेज़ नहीं थे | दूसरे बच्चों के जैसे वो भी गलतियां करते थे | पर वो अपनी कहि बात पर अडिग रहते थे , कोई गलती होने पर वो कह देते थे के आगे से ऐसा नहीं करुगा तो वो वैसा बिलकुल भी नहीं दोहराते थे | 

1887 में उन्होंने मेट्रिक पास की | इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया | पहले वो गुजरती भषा में पढ़ते थे परन्तु कॉलेज में आने के बाद उन्हें अंग्रेजी भी पढ़नी पड़ती थी और अंग्रेजी पढ़ना उन्हें पसंद नहीं था |

गाँधी जी शुरू से एक डॉक्टर बनना चाहते थे , उनकी माता जी वैष्णवमत को मानती थी और उनके मुताबिक वैष्णवमत में किसी प्राणी के शरीर को काटने की अनुमति नहीं है , जिस वजह से वो डॉक्टर नहीं बन सकते | 

डॉक्टर न बनने की सूरत में उन्होंने बैरिस्टर बनने  का फैसला किया और वो इंग्लैंड चले गए |

गाँधी जी की अफ़्रीकी यात्रा

इस घटना का गाँधी जी पर गहरा असर पड़ा | गाँधी जी ने इस तरह के नस्लीय अत्याचार के विरुष आवाज़ उठाने का फैसला किया | दक्षिण अफ्रीका पहुंच कर उन्होंने देखा के इस तरह की घटनाएं वहां भारतीय लोगों के साथ आम हो रही है , भारतीय लोग इस तरह के अत्याचार को हर रोज़ सह रहे हैं , गाँधी जी ने इस अत्याचार के खिलाफ 1894 में  नाटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की और वहां रहते भारतियों के लिए लड़े | 

महात्मा गाँधी जी की भारत वापसी

1916 में गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौट आये | भारत के लोगों ने गाँधी जी का स्वागत किया और उन्हें महात्मा बुलाना शुरू किया | 1914 से लेकर 1919 तक पहला विश्व युद्ध चला और इस युद्ध में अंग्रेज़ों ने भारत का सहयोग माँगा |

तो गाँधी जी ने एक शर्त पर अंग्रेज़ों की मदद करने का वादा किया के अँगरेज़ विश्व युद्ध के बाद भारत को आज़ादी देंगे, परन्तु विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ऐसा नहीं हुआ और जिससे गाँधी जी ने अंग्रेज़ों को भारत से भर भेजने का प्रण कर लिया | उन्होंने 1920 मे असहयोग आंदोलन चलाया |

महात्मा गाँधी जी के आंदोलन

गाँधी जी ने अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई के लिए बहुत सरे आंदोलन चलाये | उन्होंने इन आंदोलनों के ज़रिये भारतीय लोगों को जागरूक किया और अंग्रेज़ों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया | गाँधी जी द्वारा चलाये सभी आंदोलन बहुत शांतिपूर्वक चलाये गए थे , सभी आंदोलनों को अहिंसापूर्वक पूरा किया गया और इनके बीच गाँधी जी को कई बार जेल भी जाना पड़ा | 

चम्पारण और खेड़ा सत्याग्रह

भारत में नील की खेती सदियों से की जा रही थी | और अभी भी भारतीय किसान नील की खेती कर रहे थे | अंग्रेज़ों ने भारतीय किसानों को नील की खेती और अधिक मात्रा में करने का आदेश दिया और सबसे ज्यादा दुःख की बात यह थी के अंग्रेज़ों द्वारा दी जाने वाली राशि बहुत कम थी और किसानों को अपनी मेहनत  का पूरा मूल्य चाहिए था |

इसलिए उन्होंने गाँधी जी की मदद ली और गाँधी जी ने 1918 में इस आंदोलन की शुरुआत की | इस आंदोलन को बहुत शांतिपूर्वक चलाया गया और आखिर  अंग्रेज़ों को किसानों की बात माननी  पड़ी  |

इसी  साल खेड़ा गांव के किसान भी बहुत परेशान  हो गए | वहां आई अचानक बढ़ से पूरी फसल बर्बाद हो गयी , खाने को एक दाना भी नहीं बचा और अँगरेज़ सरकार लगातार वहां के लोगों से टैक्स वसूलना  चाहती थी, गाँधी जी ने किसानों के लिए  आंदोलन  चलाया और किसानों की मुश्किल को हल किया |

खिलाफत आंदोलन

तोड़ो और राज करो की नीति अंग्रेज़ों की बहुत पुराणी नीति थी | अँगरेज़ किसी भी कीमत पर भारत के हिन्दू मुस्लिम लोगों को एक साथ नहीं होने देना चाहते थे क्योंकि अँगरेज़ जानते थे के अगर हिन्दू मुस्लिम एक हो गए तो उनकी ताकत बहुत बढ़ जाएगी , और 1919 के समय कांग्रेस भी कमज़ोर पद रही थी , तो गाँधी जी ने मुस्लिम समाज के साथ मिल कर खिलाफत आंदोलन को चलाया |

उन्होंने पुरे देश के मुस्लिम समाज ने इस आंदोलन और गांधी जी को बहुत सहयोग दिया जिससे गाँधी जी एक राष्ट्र नेता बन गए | 1922 में यह आंदोलन बंद हो गया पर गांधी जी पूरी उम्र हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए डटे रहे |

असहयोग आंदोलन

1919 में जलिआवला बाघ में हुए गोलीबारी से पूरा विश्व कम्प गया | हज़ारों की संख्या में निर्दोष लोगों पर अँगरेज़ सरकार ने गोलीबारी की जिससे कितने ही लोग शहीद हो गए | इस घटना के बाद गाँधी जी को यह विश्वास हो गया के अँगरेज़ किसी के प्रति भी दया नहीं रखते|

गाँधी जी ने 1920 में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाया , जिससे लाखों भारतीय जुड़े , गाँधी जी ने लोगों को आज़ादी के मायने बताये और अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई और तेज़ करने के लिए जागरूक किया |

दांडी मार्च

भारत में नमक की पैदावार होती थी और वो भी बहुत ज्यादा मात्रा में | नमक किसी भी घर के लिए एक अहम मसालों  में  अत है या हम यह भी कह सकते हैं के कोई भी घर ऐसा नहीं है जो नमक का इस्तेमाल न करता हो | किसी अत्यंत गरीब व्यक्ति को अगर एक वक्त कोई तरकारी नहीं मिलती तो वो नमक के साथ रोटी खा के अपना पेट भरता है |

नमक ही एकमात्र ऐसी चीज थी जिसपर कोई टैक्स नहीं था और उसपर किसी का एकाधिकार नहीं था , परन्तु साल 1930 , में अंग्रेज़ों ने भारतीय नमक पर अपना एकाधिकार जताया और नमक पर टैक्स लगा दिया जिससे गाँधी जी ने साबरमती आश्रम से लेकर दांडी गांव तक 24 दिन पैदल मार्च निकाला , करोड़ों लोगों ने गाँधी जी का साथ दिया | यह आंदोलन एक महत्वपूर्ण आंदोलन साबित हुआ |

दलित आंदोलन

भारत में दलितों के साथ भेदभाव सदियों पुराना है | लोग आज भी धर्म जाती के बंधनों में बंधे हुए हैं , लोगों को समानता का पथ पढ़ने के लिए गाँधी जी ने 1932 में अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना की और लोगों को छुआछूत का पाठ पढ़ाया लोगों को समझाया के किसी के छूने से कोई अपवित्र नहीं हो सकता हम सब लोग उस एक भगवान के बनाये हुए हैं जब भगवान हमे बनाते हुए कोई छुआछूत नहीं करता तो हम इंसान होकर ऐसा क्यों करते हैं | 

गांधी जी ने 1933 में इस आंदोलन की शुरुआत की |

भारत छोड़ो आंदोलन

अंग्रेज़ों के अत्याचार भारतियों पर बढ़ते जा रहे थे , भारतीय लोग गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए थे , जहां बहुत सारे शूरवीर अंग्रेज़ों के अत्याचारों का जवाब उन्ही की भाषा में दे रहे थे वही दूसरी और गाँधी जी अभी भी अहिंसा वाले रस्ते पर डटे हुए थे और इसी रस्ते को सबसे उत्तम मानते थे , क्योंकि वो कहते थे के अगर हम भी हिंसा करने लगे तो उनमे और हममे क्या अंतर् रह जायेगा | इसी लिए गाँधी जी ने 1942 में अंग्रेज़ों के खिलाफ भारत छोडो आंदोलन की शुरुआत की | यह आंदोलन बहुत शांति पूर्वक चलाया और आखिरकार अंग्रेज़ों को भारत छोड़ क्र जाना पड़ा |

महात्मा गाँधी की मृत्यु

गाँधी जी की अहिंसावादी सोच और उनके द्वारा चलाये शांतिपूर्वक आंदोलनों से अँगरेज़ बहुत प्रभावित हुए और 15 अगस्त 1947 को वो भारत छोड़ कर चले गए , भारत को आज़ादी मिली और साथ में भारत को इस आज़ादी की एक बहुत बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी , भारत के 2 टुकड़े किये गए, हिंदुस्तान और पाकिस्तान |

जिससे बहुत नरसंहार हुआ , कितने ही निर्दोष मरे गए , करोड़ों लोगों को एक से दूसरी जगह पलायन करना पड़ा और आज़ादी की कीमत बहुत महंगी पड़ी |

1948 को नाथूराम गोडसे जो हिन्दू राष्ट्रवादी और हिन्दू महासभा का सदस्य था, नाथूराम ने गांधी जी को 3 गोलियां मारी और वहां पर गांधी जी का देहांत हो गया | उनको मारने के बाद नाथूराम वहां से भागा नहीं बल्कि आत्मसमर्पण किया |

महात्मा गाँधी जी जैसा कोई दूसरा नहीं हुआ | उन्होंने भारत सहित पुरे विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ाया | उन्होंने अपने जीवन में बहुत अत्याचार शी पर कबि भी हिंसा नहीं की, अत्याचार का जवाब अहिंसा से दिया और यही कारण है के 2007 से संयुक्त राष्ट्र संघ , 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाती है |

गाँधी जी से पूरी दुनिया के लोग प्रेरित होते था, बहुत सारे लोगों के गाँधी जी के अहिंसा के मार्ग पर चलकर अपने देश को आज़ादी दिलवाई जिसमे से नेल्सन मंडेला एक नाम है, वो भी गाँधी जी के असूलों और चलते थे और इसी वजह से उन्हें दक्षिण अफ्रीका का गाँधी कहा जाता है | 

गांधी जी एक उत्तम महापुरुष थे, जिनके जैसा मानवीय इतिहास में कोई और नहीं हुआ और न ही कोई होगा | 

गांधी जी के जन्मदिन यानी 2 अक्टूबर को हम उन्हें नमन करते हैं और सदा अहिंसा के रस्ते पर चलने का प्रण करते हैं|

Rahul Sharma

हमारा नाम है राहुल,अपने सुना ही होगा। रहने वाले हैं पटियाला के। नाजायज़ व्हट्सऐप्प शेयर करने की उम्र में, कलम और कीबोर्ड से खेल रहे हैं। लिखने पर सरकार कोई टैक्स नहीं लगाती है, शौक़ सिर्फ़ कलाकारी का रहा है, जिसे हम समय-समय पर व्यंग्य, आर्टिकल, बायोग्राफीज़ इत्यादि के ज़रिए पूरा कर लेते हैं | हमारी प्रेरणा आरक्षित नहीं है। कोई भी सजीव निर्जीव हमें प्रेरित कर सकती है। जीवन में यही सुख है के दिमाग काबू में है और साँसे चल रही है, बाकी आज कल का ज़माना तो पता ही है |

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