जुगनू हाज़िर है – भगवंत मान

Bhagwant Mann Biography in Hindi – भगवंत मान आज पंजाब में आम आदमी पार्टी का चेहरा हैं | वो लोकसभा में आप के अकेले उमीदवार हैं और पंजाब से हैं | आइये भगवंत मान के जीवन को थोड़ा और करीब से जानते हैं |

कई बार कोई नाम हमें हमेशा याद रहता है। वो चाहे किसी अभिनेता का हो, किसी लेखक का या किसी राजनेता का। जो भी आम आदमी की आम आवाज़ को ऊपर तक पहुंचाता है बेशक वो अपनी रचनाओं के ज़रिये हो या फिर अपनी हास्प्रद बातें हो।

आम लोगों की हर रोज़ की परेशनियों को, एक साधारण व्यक्ति की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को, एक गांव में रहने वाले साधारण से व्यक्ति की साधारणता को इस कलाकार ने बहुत ही सटीक तरीके से पेश किया है।

जी हाँ हम बात कर रहे है एक ऐसे कलाकार की जो व्यवहार में एक गांव में रहने वाला व्यक्ति है और अपनी मिट्टी से जुड़ा हुआ है। ये बात नई नहीं है जब वो अपनी कॉमेडी एलबम्स के ज़रिये किसी गंभीर समस्या को भी बेहद सहजता से और मनोरंजक तरीके से पेश कर देता था। 

उसके द्वारा कही  गयी कटाक्ष भरी बातें जो आम की ज़िंदगी से सीधे तौर पर जुडी हुई थी लोग आज भी उनकी बातें सुनकर उतना ही हस्ते हैं और गंभीरता से विचार करते हैं के जो बोलै है वो सच बोला है। 

हम बात कर रहे हैं उस व्यक्ति की जो सबकी उम्मीद बना हुआ है के वो एक बेहतर भविष्य दे पायेगा। हम बात कर रहे हैं पंजाब के मशहूर कलाकार, लेखक, राजनेता, हास्य अभिनेता भगवंत मान की। पंजाब में ज्यादातर लोग भगवंत मान को जुगनू नाम से जानते हैं क्योकि टीवी पर उनके द्वारा पेश किया गया जुगनू नाम का किरदार हमेशा के लिए लोगों के दिलों में समा गया है। 

भगवंत मान का जन्म और शिक्षा Bhagwant Mann Birth And Education

भगवंत मान एक पंजाबी परिवार में पैदा हुए थे।  इनका जन्म 17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के संगरुर जिला के स्तोज गांव में सरदार महिंद्र सिंह के घर हुआ था।  बचपन से ही ये एक तेज़ बुद्धि वाले बालक थे और बातें बनाने में इनका दिमाग बहुत तेज़ थे। 

पढ़ाई में भी ये ठीक ठाक ही थे क्योकि इनका मन पढ़ाई से ज्यादा कॉमेडी में लगता था।  इन्होने ग्रेजुएशन करने के लिए शहीद उधम सिंह सहकारी कॉलेज संगरुर में दाखिला लिया पर पढ़ाई से ज्यादा मन ड्रामा में लगने की वजह से इन्होने 1 साल के बाद ही कॉलेज छोड़ दिया। 

भगवंत मान का करियर Bhagwant Mann Career

भगवंत मान ने अपना करियर यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित युवक मेलों में भाग ले कर किया और जब अंतर क्षेत्रीय युवक मेले में उन्होंने अपने कॉलेज के लिए 2 स्वर्ण पदक जीते , तबसे इनके चर्चे पूरे इलाके में हो गए। 

इन्होने अपनी पहली कॉमेडी एल्बम 1992  ” गोभी दिए कच्चीए वपारणे ”  से की और इसके बाद उनके एल्बम 1993 में  ” कुल्फी गरमा गर्म ” आयी जिससे ये एक सफल कॉमेडियन की तालिका में पहले नंबर पर आ गए। 

भगवंत मान की कॉमेडी में वो राजनीती , पुलिस वालो, बड़े उद्योगपतियों और पर सीधा तंज कस्ते थे और लोगों को सामाजिक कुरीतियों से जागरूक करते थे।  उनके द्वारा बनाये गए और पेश किये गए सभी किरदार , आम ज़िंदगी से ही प्रभावित होते थे जिससे वो आसानी से आम लोगों से अपने किरदारों के ज़रिये जुड़ जाते थे। 

इसके बाद इन्होने पीछे मुद कर नहीं देखा एक के बाद एक इनकी कितनी ही एल्बम्स आयी और और दर्शकों ने उन्हें बहुत पसंद किया और इनके बहुचर्चित किरदार जुगनू पर ही इनका नाम जुगनू रख दिया। 

1990 के दशक में इसके साथी जगतार जग्गी के साथ इनकी जोड़ी को लोगों ने बहुत पसंद किया पर 2006 में राणा रणबीर नाम के अदाकार ने इनका हाथ थामा और लोगों के बीच इनकी जोड़ी पहले के मुकाबले और भी ज्यादा पसंद की गयी। 

इन्हे अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर इतनी  पहचान नहीं मिली थी पर अचानक ये स्टार वन टीवी चैनल पर आने वाले एक कॉमेडी शो लॉफ्टर चैलेंज में दिखाई दिए जहा पर इनकी अलग तरह की कॉमेडी और कटाक्ष भरे चुटकुलों को सुनकर पंजाब के साथ साथ पूरा देश भी हसा। तबसे ये पंजाब में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में लोकप्रिय हो गए। 

इसके बाद वो बहुत सारी पंजाबी फिल्मों में भी नज़र ए और बहुत सारी फिल्मों में बतौर अभिनेता और लेखक भी काम किया। 

एल्बम्स Albums

अपने पूरे करियर के दौरान इन्होने 25 से ज्यादा एल्बम्स , 15 से ज्यादा फ़िल्में और 15 से ज्यादा टीवी शोज में काम करके लोगों के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाई है। 

  • कुल्फी गरमा गर्म
  • कुल्फी गरमा गर्म 2 
  • जगदे रहो
  • लल्लू करे क्वॉलियाँ
  • भगवंत मान 420 
  • की मैं झूठ बोलिया
  • धक्का स्टार्ट 
  • पंज दूनी वीह 
  • गुस्ताखी माफ़
  • भगवंत मान नॉन स्टॉप 
  • सावधान अग्गे भगवंत मान 
  • पप्पू पास हो गया 
  • बाई जी तुसी घैंट हो 
  • हीरो हिटलर
  • नैन प्रीतो दे 
  • सुखमनी 

अदि एल्बम्स और फिल्मों में काम करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 

भगवंत मान और राजनीति Bhagwant Mann Political Career

भगवंत मान ने 2011 में राजनीति से हाथ मिला लिया और पीपल’स पार्टी ऑफ़ पंजाब के मेंबर बन गए जिसके सरपरस्त मनप्रीत सिंह बदल थे और उन्होंने पंजाब के लेहरागागा से चुनाव लड़ा।  राजनीति में इनका कदम नया नया था और एक कॉमेडी कलाकार अचानक से राजनीति में उत्तर आया ये बात भी लोगों को कुछ पसंद नहीं आयी और वो 2012 में हुए चुनाव हार गया। 

पर इसके बाद इनको पता चल गया के राजनीति किसी होती है और इसमें खुद को कैसे सम्भाला जा सकता है।  इनको राजनीति में हो रही बेईमानी का भी राजनीति में आकर ही पता चला और इसके बाद उन्होंने वो पार्टी छोड़ दी और 2014 में यह अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी में भर्ती हो गए। 

आम आदमी पार्टी पंजाब के लोगों को बहुत सारे वादे कर रही थी पंजाब के लोगों को एक सुखद जीवन देने का दावा कर रही थी।  भगवंत मान ने अपने ही क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया और उनका फैसला सही साबित हुआ। उन्होंने 2014 के चुनावों में एक रिकॉर्ड बना दिया। 

अपने प्रतिद्वंदी सुखदेव सिंह ढींडसा को जो पंजाब की बहुत पुरानी पार्टी शिरोमणि अकाली दाल के एक प्रमुख नेता थे, उसे 200,000 वोटों से हरा दिया। 

 इसके बाद भगवंत मान पूरे पंजाब के चहेते नेता बन गए और नौजवानों के लिए तो आदर्श बन गए। 

पार्लिमेंट का मेंबर बनने के बाद भी इन्होने आम लोगों से जुड़े मुद्दों को नहीं छोड़ा, ये हमेशा सभा में आम लोगों की परेशानियों के ऊपर वाद विवाद करते रहते हैं।  आम लोगों से किये गए झूठे वादों को लेकर ये दूसरी पार्टियों से सवाल जवाब करते हैं जिसकी वजह से यह कई बार विवादों में भी घिरे हैं। 

दूसरी पार्टी के नेताओं पर निशाना लगाने के इलावा भगवंत मान एक एन जी ओ चलते हैं। यह एन जी ओ खास कर बच्चों के लिए काम करती है , पिछले कुछ सालों से पंजाब की धरती का पानी बहुत विषैला हो गया है, जिसे पीने से बहुत सारी गंभीर बीमारियां हो जाती है। 

कई बार तो ये बीमारियां ला-इलाज हो जाती है। भगवंत मान ने ऐसे ही पीड़ित बच्चों के लिए लोक लहर फाउंडेशन नाम की एन जी ओ शुरू की है।  जो लोगों को खराब पानी के लिए जागरूक करती है और ऐसे पीड़ित बच्चों का इलाज करती है। 

अगले साल 2022 में होने वाले पंजाब में चुनावों में भगवंत मान एक अहम उम्मीदवार है। लाखों लोगों की उम्मीदे भगवंत मान पर टिकी हैं के वो एक बार सत्ता में आएगा और हमारी परेशानियों को दूर करेगा।

Rahul Sharma

हमारा नाम है राहुल,अपने सुना ही होगा। रहने वाले हैं पटियाला के। नाजायज़ व्हट्सऐप्प शेयर करने की उम्र में, कलम और कीबोर्ड से खेल रहे हैं। लिखने पर सरकार कोई टैक्स नहीं लगाती है, शौक़ सिर्फ़ कलाकारी का रहा है, जिसे हम समय-समय पर व्यंग्य, आर्टिकल, बायोग्राफीज़ इत्यादि के ज़रिए पूरा कर लेते हैं | हमारी प्रेरणा आरक्षित नहीं है। कोई भी सजीव निर्जीव हमें प्रेरित कर सकती है। जीवन में यही सुख है के दिमाग काबू में है और साँसे चल रही है, बाकी आज कल का ज़माना तो पता ही है |

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