ताजमहल की यह बातें आपको नहीं पता होंगी

दुनिया भर में मोहब्बत की निशानी समझे जाने वाले ताज महल के बारे में अब तक इतना कुछ कहा और पढ़ा जा चुका है कि लोगों को इसके बारे में बेसिक बातें तो कंठस्थ हो गई है। जैसे कि Tajmahal kahan hai, Taj Mahal kab bana tha, ताजमहल बनाने वाले का नाम और क्यों बनवाया गया था ताजमहल |  

अगर आपको ये सब याद नहीं तो हम आपको ये सब तो बताएंगे ही साथ ही आपको इन बातों से हटकर आपको ताजमहल के बारे में कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिनके बारे में आपने अब तक कहीं सुना भी नहीं होगा। जैसे कि क्या शाहजहाँ ने ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ काट दिए थे या फिर दुश्मन के लड़ाकू जहाजों से कैसे बचाया जाता है ताज | 

Facts About Taj Mahal in Hindi के इस लेख में हम आपको ताजमहल के बारे में कुछ बेहद ही हैरान करने वाले तथ्यों के बारे में बताएंगे तो हमारे साथ अंत तक बने रहें | 

ताजमहल के बारे में रोचक बातें Facts About Taj Mahal in Hindi

facts about taj mahal in hindi
Facts about Taj Mahal in Hindi

नंबर 10 – मुमताज महल के मकबरे की छत में है रहसयमई छेद

ये तो आप जानते ही होंगे कि ताजमहल के अंदर ही शाहजहां की बीवी मुमताज महल का मकबरा है। अगर आप कभी ताजमहल गए होंगे या फिर आपने ताजमहल के बारे में पढ़ा होगा तो ये आपको मालूम होगा कि मुमताज महल के मकबरे के छत में एक छेद है। साथ ही मुमताज महल का मकबरा हमेशा नमी में ही रहता है। लेकिन क्या कभी आपने इसके पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश की है…?

वैसे तो मुमताज महल के मकबरे के छत में छेद होने के पीछे लोग अलग-अलग तरह के तर्क देते हैं। लेकिन ऐसा माना जाता है कि जब शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले मजदूरों के हाथ कटवाने का फरमान जारी किया तो मजदूर इससे निराश हो गए और उन्होंने मकबरे को मुकम्मल करने की बजाय छत में एक छेद छोड़ कर इसे अधूरा छोड़ दिया।

माना जाता है कि इसी छत की वजह से मुमताज महल का मकबरा हमेशा पसीजता रहता है और यहां हमेशा आवश्यकता से अधिक नमी बनी रहती है। वैसे कई इतिहासकार दावा करते हैं कि शाहजहां द्वारा कारीगरों के हाथ कटवाए जाने की बातें महज़ एक अफवाह है क्योंकि इतिहास में इस बात का उल्लेख नहीं मिलता है।

नंबर 9 – यमुना नदी के किनारे क्यूँ है ताजमहल 

ये तो आपने सुना ही होगा कि ताजमहल का निर्माण यमुना नदी के किनारे पर किया गया है। लेकिन क्या आपको इसके पीछे की खास वजह मालूम है…?

दरअलस, ताजमहल का निर्माण एक बहुत बड़े चबूतरे पर किया गया है और यह चबूतरा एक बेहद ही खास किस्म की मजबूत लकड़ी पर टिका हुआ है। इस लकड़ी की खासियत यह है कि यह लकड़ी पानी सोखने की वजह से हमेशा मजबूत बनी रहती है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ताजमहल को यमुना नदी के किनारे पर बनाया गया ताकि ताजमहल के बेस में मौजूद लकड़ी को हमेशा पानी मिलती रहे ताकि इसकी मजबूती हमेशा बनी रहे। अगर ताजमहल को यमुना नदी की बजाय कहीं ऐसी जगह बनाया जाता जहां पानी का स्रोत नहीं होता तो रिसर्च के मुताबिक अब तक ताजमहल गिर गया होता।

नंबर 8 – ताजमहल के मीनार झुके हुए हैं 

अक्सर इमारतों पर बनने वाले मीनार को बिल्कुल सीधा बनाया जाता है। मगर ताजमहल के मीनार थोड़े झुके हुए बनाए गए हैं। इसके पीछे की वजह यह है कि दुर्भाग्य से कभी अगर ताजमहल पर बिजली गिरती है तो बिजली ताजमहल के मुख्य मीनार की बजाय इसके कोनों पर मौजूद मीनारों पर गिरे और ताजमहल को कम से कम नुकसान हो। 

नंबर 7 – कुतुबमीनार से लम्बा है ताज 

आप शायद इस बात पर यकीन नहीं करेंगे की ताजमहल की ऊंचाई भारत के सबसे ऊंचे मीनार कुतुब मीनार से भी ज्यादा है। दरअसल कुतुब मीनार की कुल ऊंचाई 72.5 मीटर है जबकि ताजमहल की कुल ऊंचाई 73 मीटर है। वैसे कुछ लोग कुतुबमीनार की ऊंचाई 73 मीटर बताते हैं लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक कुतुब मीनार की वास्तविक ऊंचाई 72.5 मीटर ही है।

नंबर 6 – बिना मोटर चलते हैं फंवारे 

वैसे तो ताजमहल आश्चर्य से कम नहीं हैं। मगर इसमें लगा फव्वारा भी कम हैरान करने वाला नहीं है। दरअसल ताजमहल के सामने लगा हुआ फव्वारा बिना किसी मशीन और मोटर सिस्टम के चलता है। इसे इस तरीके से बनाया गया है की सभी फव्वारे एक साथ चलते हैं और एक ही साथ बंद होते हैं।

दरअसल ताजमहल के सामने जितने भी फव्वारे लगे हुए हैं उनके नीचे सेपरेट टँकी भी दी गई है। इस टंकी में पानी भरने का सिस्टम ऐसे फिक्स किया हुआ है कि सभी टंकी एक साथ भरते हैं। ऐसे में एक ही समय में सभी टंकियों में बराबर प्रेशर बनता है और फिर पानी फवारे के रूप में ऊपर आता है। इसी तरह सभी फव्वारे बंद भी एक साथ ही होते हैं।

नंबर 5 – दुश्मन से बचाने के लिए ढका जाता है ताजमहल 

आम दिनों में दुनिया भर के लोग ताजमहल की भव्यता को देखने आते रहते हैं। प्रत्येक दिन ताजमहल को हजारों लोग देखते हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी मौका आया है जब ताजमहल को दुनिया की नजरों से छुपाया भी गया था।

दरअसल दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और 1971 के भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान ताजमहल को पूरी तरीके से बांस से और हरे रंग के चादर से ढक दिया गया था।

ऐसा करने के पीछे की वजह यह थी कि कुछ लोग ऐसी आशंका जता रहे थे कि संभव है कि युद्ध के दौरान ताजमहल को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में दुश्मनों की नजरों से ताजमहल को बचाए रखने के लिए इसे पूरी तरीके से बांस बल्लो और चादरों से ढक दिया गया था। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद ताजमहल को जनता के लिए खोल दिया गया।

नंबर 4 – ताजमहल बनाने वालों के काट दिए थे हाथ ?

ऐसा आमतौर से कहा जाता है कि ताजमहल बनाने वाले मुख्य कारीगर के हाथ शाहजहां ने कटवा दिए थे ताकि ये कारीगर दुनिया में कहीं फिर से ऐसी इमारत ना बना सके।

जैसा की वीडियो की शुरुआत में हमने बताया भी है कि इतिहासकारों की राय है कि यह बात महज एक अफवाह है क्योंकि इतिहास के पन्नों में झांकने पर कहीं ऐसे तथ्य नहीं मिलते हैं जहां कारीगरों के हाथ काटने के बाद आई हो।

हाथ काटने वाली बात इसलिए भी झूठी साबित होती है क्योंकि ताजमहल बनाने वाले मुख्य कारीगरों में शामिल उस्ताद अहमद लाहौरी ने ताजमहल के बनने के बाद लाल किले के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में अगर शाहजहां ने कारीगरों के हाथ काट दिए होते तो फिर उस्ताद अहमद लाहौरी लाल किले के निर्माण में शामिल नहीं हो सकते थे।

नंबर 3 – 28 तरह के पत्थरों से बना ताज 

कहा जाता है कि ताजमहल के अंदर नक्काशीयों को सजाने के लिए इतनी कीमती पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था जितना कि आज तक किसी दूसरे इमारत में नहीं किया गया है। ताजमहल को भव्य बनाने के लिए शाहजहां ने दुनिया भर के अलग-अलग देशों से 28 तरह के बेहद ही नायाब और बेहद कीमती पत्थर मंगवाए थे।

ये पत्थर ऐसे थे कि हर कोई इसे देखकर आश्चर्यचकित रह जाता था। ये पत्थर ताजमहल की खूबसूरती में और भी चार चांद लगाते थे मगर अंग्रेजों की काली नजर से ताजमहल के ये चमकते महंगे पत्थर नहीं बच सके और अंग्रेजों ने सारे पत्थर को उखाड़ लिया और अपने साथ लेकर चले गए।

नंबर 2 – आज 800 करोड़ है कीमत 

ताजमहल का निर्माण 1631 से शुरू हुआ था 1648 में कंप्लीट हो गया था। मगर माना जाता है कि पूरी तरीके से ताजमहल को तैयार होने में 1653 तक का समय लगा था। ताजमहल को भव्य बनाने में बेतहाशा पैसे खर्च किए गए थे।

माना जाता है कि 1631 से 1653 के बीच ताजमहल के निर्माण पर कुल 32 मिलीयन रुपए यानी लगभग तीन करोड़ 20 लाख रुपए खर्च हुए थे। अगर आज के डेट में ताजमहल जैसी बिल्डिंग बनाई जाए तो अनुमान के मुताबिक ऐसी बिल्डिंग बनाने के लिए लगभग 80 बिलियन रुपए यानी 800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च आएगा।

नंबर 1 – काले ताजमहल का सपना रहा अधूरा 

दुनिया में हमेशा सफेद संगमरमर से बने ताजमहल की ही चर्चा होती है लेकिन दूसरी तरफ काले रंग के पत्थर से बन रहे ताजमहल की चर्चा शायद ही कभी होती है। बहुत लोग इसके बारे में जानते भी नहीं है।

दरअसल जब ताजमहल बनकर तैयार हो गया तो शाहजहां ने एक और ताजमहल बनाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया और इस ताजमहल के ठीक दूसरी तरफ दूसरे ताज महल का निर्माण शुरू हुआ। दूसरा ताजमहल सफेद की बजाय काले संगमरमर से बनाया जा रहा था। ये महल शाहजहां खुद के लिए बनवा रहा था।

मगर इसी बीच शाहजहां को कैद कर लिया गया। इस कारण शाहजहां के दूसरे ताजमहल का सपना अधूरा रह गया आज भी शाहजहां के अधूरे सपने को आप देख सकते हैं।

FAQ’s About Taj Mahal in Hindi

ताजमहल कहाँ है

ताजमहल आगरा में यमुना नदी के किनारे पर है |

ताज महल कब बनाया गया था 

ताजमहल का निर्माण 1631 में शुरू हुआ था और 1648 में ये बनकर तैयार हो गया था |

ताजमहल बनाने वाले का नाम

ताजमहल का निर्माण करने वाले कारीगर उस्ताद अहमद लाहौरी थे, जिन्होंने बाद में लाल किले का निर्माण भी किया था | ताजमहल का निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में करवाया था |  

ताजमहल बनाने में कितना रुपया लगा

उस समय के हिसाब से ताज महल को बनाने में 3 करोड़ 20 लाख रूपए खर्च हुए थे जो कि आज के हिसाब से 800 करोड़ से भी ज्यादा हैं |

Shubham

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